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Thursday, October 31, 2019

मिर्गी के लिए 8 आसान योगासन – Yoga for Epilepsy in Hindi

मिर्गी से अधिकतर लोग भली-भांति परिचित होंगे, लेकिन इससे कैसे निपटा जाए, इसके बारे में शायद कम लोगों को ही पता हो। इसकी गिनती गंभीर मस्तिष्क विकारों में होती है, जो किसी को भी, किसी भी समय अपना शिकार बना सकता है। हालांकि, इसके उपचार के कई आधुनिक विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनके दुष्परिणाम इस समस्या को और भी जटिल बना सकते हैं। ऐसे में मिर्गी से बचने और इसके उपचार के लिए योग एक सटीक और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में मिर्गी के लिए योगासन और मिर्गी से बचने के लिए योग किस प्रकार सहायता करता है, इसकी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।

सबसे पहले जानते हैं कि योग किस प्रकार मिर्गी में लाभदायक है।

मिर्गी में कैसे लाभदायक है योग – How Does Yoga Help with Epilepsy in Hindi

मिर्गी एक घातक मस्तिष्क विकार है, इसमें व्यक्ति की नर्व सेल्स प्रभावित होती हैं और व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं। मिर्गी के दौरे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित करते हैं (1), (2) । इसलिए, इसका उपचार करना जरूरी हो जाता है। आधुनिक दवाइयों से अलग, योग भी मिर्गी से बचाव का एक कारगर तरीका हो सकता है। योग में कई ऐसे आसन हैं, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार और उसे सही से काम करने में मदद कर मिर्गी से निपटने में सहायक साबित हो सकते हैं। साथ ही योग, स्ट्रेस जैसे मिर्गी के कारणों को भी ठीक कर मिर्गी से बचाव कर सकता है (3)।

आइए नीचे जानते हैं, मिर्गी के लिए योगासन के बारे में, जो मिर्गी रोग को दूर रखने में आपकी मदद कर सकते हैं।

मिर्गी के लिए योगासन – Yoga for Epilepsy in Hindi

मिर्गी के लिए किए जाने वाले योगासन और उसकी विधि के बारे में आपको सटीक जानकारी बिंदुवत रूप में नीचे बताई जा रही है।

1.उत्तन्नासन

Elation

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उत्तनासन के जरिए मिर्गी की समस्या से बचा जा सकता है। दरअसल, एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह बताया गया कि उत्तनासन के जरिए मेंटल स्ट्रेस कम होता है। जैसा कि आपको ऊपर बताया जा चुका है कि मिर्गी के प्रमुख कारण में स्ट्रेस भी शामिल है। इसलिए, स्ट्रेस को ठीक करके मिर्गी की समस्या से बचा जा सकता है (4)। नीचे जानिए कैसे करें उत्तनासन-

कैसे करें
  • सबसे पहले समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • अब सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएं।
  • अब अपने हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं।
  • अब हाथों को बिना मोड़े, सामने की तरफ झुकें।
  • फिर दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठों को छूने का प्रयास करें। ध्यान रहे आपके घुटने बिलकुल भी न मुड़ें।
  • अपनी क्षमता अनुसार अपने सिर को घुटनों के पास ले जाएं।
  • अगर आप इतनी प्रक्रिया को बड़ी आसानी से कर लें, तब अपने हाथों को पैरों के पीछे की ओर ले जाकर ऐड़ी के ऊपरी हिस्से को पकड़ने की कोशिश करें।
  • अब इस मुद्रा में कुछ देर बने रहने का प्रयास करें।
  • फिर धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस चक्र को 4-5 बार किया जा सकता है।
सावधानियां
  • अगर आप घुटने या पीठ दर्द की समस्या से परेशान हैं, तो इस योग को करने से बचें।
  • ध्यान रहे कि खाना खाने के तुरंत बाद इस योग को न करें।  

2.मत्स्यासन

 Matsyasan

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इस योगासन में शरीर की मुद्रा कुछ मछली की जैसी होती है। मत्स्यासन योगासन नर्वस सिस्टम की कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे मिर्गी के खतरे को रोका जा सकता है (5)। ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि मिर्गी होने का मुख्य कारण नर्वस सिस्टम का प्रभावित होना ही है (6)।

कैसे करें
  • सबसे पहले फर्श पर योग मैट बिछा लें।
  • अब पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • अब धीरे-धीरे पीछे की और झुकें और पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब दाएं (Right) हाथ से बाएं (Left) पैर को पकड़ें और बाएं हाथ से दाएं पैर को पकड़ें।
  • अब गहरी सांस लेते हुए सीने को उठाने की कोशिश करें, ध्यान रहे कि आपका सिर जमीन से लगा हुआ होना चाहिए।
  • अब इस मुद्रा में कुछ सेकंड तक बने रहने का प्रयास करें।
  • अब सांस छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
  • इस योग चक्र को 2-3 बार किया जा सकता है।
 सावधानियां:
  • रीढ़ की बीमारी से ग्रसित और गर्भवती महिलाएं इस योगासन को करने से बचें।

3.बालासन

Balasan

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इसे चाइल्ड पोज के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन को करने के लाभ भी मिर्गी के खतरे से आपको बचा सकते हैं। दरअसल, सेंट्रल नर्वस सिस्टम ( Central Nervous System – मस्तिष्क और रीढ़ से जुड़ी क्रिया) के कार्य करने की क्षमता में दोष उत्पन्न होने के कारण मिर्गी के खतरे दिखाई पड़ सकते हैं (7)। जबकि, बालासन योग के जरिए सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम की कार्य प्रणाली में सुधार हो सकता है, जो मिर्गी रोकने में सहायता कर सकता है (8)।

कैसे करें
  • सबसे पहले एक समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए अपनी एड़ियों पर बैठ जाएं।
  • ध्यान रहे कि कूल्हों को एड़ियों पर ही रखना है।
  • अब आगे की ओर झुककर माथे को जमीन पर लगाने की कोशिश करें।
  • अब अपने हाथों को शरीर के दोनों ओर से आगे की ओर उठाते हुए जमीन पर रखें।
  • इस दौरान आपकी हथेली जमीन से चिपकी हुई होगी।
  • अब धीरे से सीने पर जांघों के जरिए दबाव दें।
  • अब अपनी क्षमतानुसार कुछ देर इसी मुद्रा में रहें।
  • अब धीरे-धीरे उठकर सामान्य स्थिति में बैठ जाएं।
  • इस योग चक्र को करीब 3-5 बार किया जा सकता है।
 सावधानियां:
  • पेट का ऑपरेशन हुआ हो, तो इस योग को न करें।
  • गर्भवती महिलाएं भी इस योग को करने से दूर रहें।

4.कपोतासन

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इसे कबूतर मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। कपोतासन करने के फायदे भी मिर्गी के लिए देखे गए हैं। दरअसल, जन्म के समय से ही चयापचय क्रिया में उत्पन्न दोष को भी मिर्गी होने का एक प्रमुख कारण माना जाता है (9)। जबकि, कपोतासन चयापचय दर में सुधार का काम कर सकता है, जिससे मिर्गी होने के खतरे को रोकने में मदद मिल सकती है (10)। हालांकि, इसपर अभी और शोध की आवश्यकता है।

कैसे करें
  • सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इसके बाद घुटने के बल खड़े हो जाएं।
  • अब अपने हाथों को सामने की ओर से ऊपर उठाकर शरीर को वक्र का आकार देते हुए पीछे की ओर ले जाएं और अपनी हथेलियों को जमीन से टिका दें।
  • इस स्थिति में आपकी हथेलियां जमीन से चिपकी हुई होंगी और आपका शरीर वक्र की स्थिति में होगा।
  • अब इसी मुद्रा में रहते हुए अपने सिर को एडियों के बीच रखने की कोशिश करें।
  • अब अपने दोनों हाथों से पैरों की एडियों को पकड़ें।
  • अपनी क्षमतानुसार इस मुद्रा में कुछ देर बने रहें।
  • अब धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस चक्र को दो से तीन बार किया जा सकता है।
सावधानियां:
  • योग प्रशिक्षक की देखरेख के बिना इस योग को करने से बचें।
  • रीढ़ की समस्या से परेशान लोग इस योग को न करें।

5. पवनमुक्तासन

Pawanmuktasan

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पवनमुक्तासन एक ऐसा योगासन है, जिसे पीठ के बल लेटकर किया जाता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह बताया गया कि योगासन के जरिए स्ट्रेस को कम करने में मदद मिलती है, जो मिर्गी के प्रमुख जोखिम कारकों में से माना जाता है। इस अध्ययन में पवनमुक्तासन को भी शामिल किया गया है, जिससे स्ट्रेस को दूर करके, मिर्गी की समस्या से बचा जा सकता है (11),(12) ।

 कैसे करें
  • सबसे पहले एक समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • अपनी पीठ के बल लेट जाएं और पैरों की बीच की दूरी को कम करें।
  • अब गहरी सांस लें और पैरों को उठाकर घुटनों से मोड़ लें।
  • अब आप अपनी बाहों से घुटनों को कस कर पकड़ लें।
  • अब सांस छोड़ते हुए, घुटनोंं को सीने के पास लाने की कोशिश करें।
  • अब सिर को उठाएं और घुटनों को ठोड़ी (Chin) से स्पर्श कराने का प्रयास करें।
  • इस मुद्रा में कुछ देर रहें।
  • अब धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस योग चक्र को 3-5 बार किया जा सकता है।
सावधानियां:
  • पीठ दर्द की समस्या से परेशान हैं, तो इस योग को करने से बचें।

6.अर्ध हलासन

Half halasan

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इस योगमुद्रा को करना बहुत आसान माना जाता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपकी नियंत्रण क्षमता अच्छी हो। मिर्गी होने के जोखिम कारकों में हाइपरटेंशन को भी गिना जाता है (13)। जबकि, अर्ध हलासन के जरिए हाइपरटेंशन को ठीक किया जा सकता है (14)। हालांकि, सीधे तौर पर यह आसन मिर्गी के लिए कितना कारगर रहेगा, इसपर अभी और शोध की आवश्यकता है।

कैसे करें
  • सबसे पहले एक समतल स्थान का चयन करें और योग मैट बिछाएं।
  • अब इस योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब अपने पैरों को सीधा करें।
  • अब अपने हाथों को सामने की ओर ले जाकर हथेलियों को जमीन से लगाएं।
  • अब अपने पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए 90 डिग्री तक ले आएं।
  • इस दौरान आपके हाथ जमीन से लगे ही रहेंगे।
  • अपने पैरों को इसी मुद्रा में कुछ सेकंड तक रखने की कोशिश करें।
  • ध्यान रहे कि आपको पेट और पैर की ताकत से ही इस मुद्रा का संतुलन बनाए रखना है।
  • अब धीरे-धीरे अपनी पहली अवस्था में आ जाएं।
  • इस योग चक्र को 3 -4 बार दोहराया जा सकता है।
सावधानियां:
  • पीठ दर्द और कमर दर्द से परेशान लोग इस योग को करने से बचें।
  • गर्भवती महिलाएं इस योग को न करें।

7. सलंब शीर्षासन

 Turn head

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सलंब शीर्षासन के जरिए भी स्ट्रेस को कम करने में मदद मिलती है, जो मिर्गी का एक प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि, इस योग का असर मिर्गी से बचने के लिए कितना लाभदायक है, इस पर अभी अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

 कैसे करें
  • सबसे पहले एक समतल जगह पर मैट बिछा लें।
  • अब घुटनों के बल मैट पर बैठ जाएं।
  • अब अपने हाथों को आगे की ओर बढ़ाकर उंगलियों को इंटरलॉक करें और जमीन पर रखें।
  • अब अपना सिर दोनों हथेलियों के बीच में रखें।
  • अब हथेलियों में अपने सिर को सहारा दें।
  • एक गहरी सांस लें और अपने घुटनो को जमीन से धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाएं।
  • अब कमर को सीधा करने की कोशिश करें।
  • ध्यान रहे कि आपके शरीर का वजन हथेलियों पर होना चाहिए।
  • अब धीरे-धीरे अपने घुटनों को ऊपर की ओर उठाएं और अपने पैरों को आसमान की ओर सीधा करने की कोशिश करें।
  • पैरों को सीधा करने पर आपका शरीर सिर के सहारे 90 डिग्री की स्थिति में आएगा।
  • इस मुद्रा में अपनी क्षमतानुसार बने रहने का प्रयास करें।
  • अगर आप पहली बार यह योगासन कर रहे हैं तो आप दीवार का सहारा या किसी व्यक्ति की मदद ले सकते हैं।
  • इस योग चक्र को 3-4 बार दोहराया जा सकता है।
सावधानियां:
  • योग प्रशिक्षक की देखरेख और उनसे परामर्श लिए बिना इस योग को न करें।
  • गर्भावस्था में भी इस योग को करने से बचें।
  • इस योग के दौरान अगर आपको चक्कर आ रहा है, तो इस योग को करने से बचें।

8. शवासन

 Embalming

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मिर्गी से बचे रहने के लिए शवासन योग के फायदे भी देखे जा सकते हैं। इसे डेड बॉडी पोस्चर भी कहते हैं। जैसा कि आपको ऊपर जानकारी दी जा चुकी है कि मिर्गी होने के आम कारणों में स्ट्रेस को भी माना जाता है (15)। दरअसल, शवासन योग के जरिए स्ट्रेस को कम करने में मदद मिलती है (16)। जिससे मिर्गी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

कैसे करें
  • एक समतल जगह पर योग मैट बिछा लें और पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब अपने दोनों हाथों को शरीर से एक फीट की दूरी पर रखें।
  • आपकी हथेलियां आसमान की ओर रहेंगी।
  • अपने दोनों पैरों को एक-दूसरे से 2 फीट की दूरी पर रखें।
  • आपका मुंह आसमान की ओर ही रहेगा।
  • अब अपनी आंखों को आराम से बंद कर लें।
  • अब सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • थोड़ी देर इसी मुद्रा में बन रहें।
  • अब वापस सामान्य स्थिति आ जाएं।
  • अच्छे परिणाम के लिए रोजाना इस आसन को किया जा सकता है।
सावधानियां:

अगर आप पीठ, हाथ और सिर में लगी हुई किसी चोट से जूझ रहे हैं, तब इस योग को नजरअंदाज कर सकते हैं।

ऊपर दिए गए मिर्गी के लिए योगासन करने के बाद जब आप सभी आसन को कर लें, तो उसके बाद शांति पाठ करने की बात भी कही जाती है। जिसमें आपको एक मंत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः” का उच्चारण करना होता है। इसके अतिरिक्त योग प्रक्रिया के दौरान बताई गई सावधानियों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। आप एक बार योग प्रशिक्षक के पास योग मुद्राओं को ठीक तरह से सीखने के लिए भी जा सकते हैं। इस लेख से जुड़े हुए किसी अन्य सवाल या सुझाव के लिए नीचे दिए गये कॉमेंट बॉक्स के जरिए हम तक अपनी बात अवश्य पहुंचाएं।

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